घर-परिवार अभियान
घर-परिवार अभियान
करुण दिव्यम ट्रस्ट का एक करुणामयी संकल्प — वृद्धों, अनाथों और दिव्यांगजनों को अपनापन, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना
•अभियान की प्रस्तावना एवं मूल भावना
समाज की वास्तविक प्रगति का पैमाना इस बात से तय होता है कि हम अपने सबसे कमजोर और असहाय वर्गों की कितनी देखभाल करते हैं। आज के भागदौड़ भरे जीवन में कई वृद्ध माता-पिता, बेसहारा अनाथ बच्चे और दिव्यांगजन अपनों के स्नेह से वंचित होकर अकेलेपन या लाचारी का जीवन जीने को मजबूर हैं।
करुण दिव्यम ट्रस्ट का 'घर-परिवार अभियान' इसी खालीपन को भरने और उन्हें एक सच्चा परिवार देने का एक पावन प्रयास है। हमारा मानना है कि हर इंसान को जीवन के अंतिम पड़ाव या शुरुआती संघर्ष के दिनों में अकेलेपन सामना न करना पड़े, बल्कि उसे एक ऐसा 'घर-परिवार' मिले जहाँ प्रेम, अपनापन, सुरक्षा और सम्मान की पूरी गारंटी हो।
•इस अभियान के मुख्य उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र
•वृद्धजनों का संरक्षण एवं वृद्धाश्रम संचालन : परिवार द्वारा त्याग दिए गए या बेसहारा बुजुर्गों के लिए सर्वसुविधा संपन्न वृद्धाश्रमों एवं डे-केयर सेंटरों का संचालन करना, जहाँ उन्हें नियमित स्वास्थ्य देखभाल, पौष्टिक भोजन और मानसिक शांति मिल सके।
•अनाथ और बेसहारा बच्चों का पालन-पोषण : माता-पिता की छत्रछाया खो चुके या सड़क पर जीवन बिताने वाले अनाथ बच्चों के लिए सुरक्षित आवासीय गृह (Orphanages) स्थापित करना, जहाँ उनके लालन-पालन, शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की पुख्ता व्यवस्था हो।
•दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण एवं पुनर्वास: शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण, सहायक उपकरण (व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र आदि) और आजीविका के अवसरों का प्रावधान करना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
•विधवाओं और संकटग्रस्त महिलाओं का संबल: असुरक्षित या पीड़ित महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा, कानूनी परामर्श, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक संबल देकर उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानित जीवन जीने योग्य
•भविष्य का दृष्टिकोण (Future Vision)
'घर-परिवार अभियान' के माध्यम से करुण दिव्यम ट्रस्ट का यह सपना है कि देश के किसी भी कोने में कोई भी वृद्ध, अनाथ बच्चा या दिव्यांग खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे।